पति-पत्नि की बहुत ही खूबसूरत रूठाई-मनाई की कविता । इसकी एक-एक पंक्ति में आंनद है, प्यार है..
अपनी गृहस्थी को कुछ
इस तरह बचा लिया करो
कभी आँखें दिखा दी
कभी सर झुका लिया करो
आपसी नाराज़गी को लम्बा
चलने ही न दिया करो
वो न भी हंसें तो
तुम मुस्करा दिया करो